विज्ञान मेला की तैयारी को लेकर विज्ञान शिक्षकों की कार्यशाला आयोजित

जांजगीर-चांपा
शुभांशु मिश्रा
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 28 फरवरी के अवसर पर आयोजित होने वाले विज्ञान मेले की तैयारियों को लेकर बीआरसीसी भवन में विज्ञान शिक्षकों की दो चरणों में कार्यशाला बीआरसी भवन बम्हनीडीह में आयोजित की गई । कार्यशाला में विज्ञान मेले की गतिविधियों को विद्यालय स्तर पर बच्चों के साथ प्रभावी एवं बेहतर ढंग से क्रियांवयन और उनकी अवधारणात्मक समझ को प्रयोगात्मक रूप कराने पर फोकस किया गया । विज्ञान शिक्षकों को मास्टर ट्रेनरों द्वारा विज्ञान प्रदर्शनी कर बताया गया ताकि विज्ञान मेले का सुचारू रूप से आयोजन हो सके ।
कार्यशाला की शुरुआत बीआरसीसी एच.के. बेहार सर के उद्बोधन से हुई, जिसमें उन्होंने सभी शिक्षकों से विद्यालय में उपलब्ध विज्ञान किट एवं सामग्री के नियमित उपयोग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि विज्ञान केवल पढ़ने का विषय नहीं है, बल्कि करने और अनुभव करने का विषय है, इसलिए बच्चों को अधिक से अधिक प्रयोगात्मक गतिविधियों से जोड़ना आवश्यक है। बैठक के दौरान पूरे समय बीआरसीसी एच.के. बेहार सर उपस्थित रहे।बैठक में विज्ञान मेले के अंतर्गत बनाए गए प्रयोग आधारित स्टॉलों का अभ्यास कराया गया, जिनमें सूक्ष्म संसार का अवलोकन करो, आओ जाँच के देखो, विद्युत चालकता का परीक्षण, पदार्थों को अलग-अलग करना सीखें, चुंबक से मनोरंजन, मॉडल बनाओ, नाप-तौल के देखो, आओ प्रतिबिंब बनाओ, पहचानो कौन (वैज्ञानिकों के बारे में), अंधविश्वासों की पड़ताल तथा विज्ञान प्रदर्शनी शामिल थे । स्टॉलों को समझने के साथ-साथ शिक्षकों ने स्वयं उनकी प्रस्तुति कर गतिविधियों को करके भी समझा। साथ ही यह भी तय किया गया कि विज्ञान मेले के दिन प्रत्येक स्टॉल के संचालन के लिए दो-दो बच्चों की जिम्मेदारी रहेगी, ताकि बच्चे स्वयं प्रयोगों का संचालन कर सकें और सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभा सकें। निर्णय लिया गया कि इन सभी गतिविधियों को पहले विद्यालयों में बच्चों के साथ कराया जाएगा, ताकि कक्षा 6, 7 एवं 8 में पढ़ाए जाने वाले विज्ञान के सिद्धांतों को बच्चे स्वयं प्रयोग करके समझ सकें।बैठक में इस बात पर विशेष चर्चा हुई कि विज्ञान मेले के दिन बच्चे केवल दर्शक न रहकर प्रत्येक स्टॉल पर अवलोकन करें, प्रयोग करें, प्रश्न पूछें, अनुमान लगाएँ, परीक्षण करें और निष्कर्ष निकालें। इससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा एवं तर्कशीलता का विकास होगा तथा आगामी परीक्षाओं में भी उन्हें सहायता मिलेगी।विद्यालयों में सक्रिय विज्ञान कॉर्नर विकसित करने के लिए सात मानक तय किए गए, जिनमें विज्ञान सामग्री की उपलब्धता, उपलब्ध संसाधनों से विज्ञान कोना का निर्माण, सामग्री के नाम व उपयोग का चार्ट प्रदर्शन, विषयानुसार नियमित प्रयोग, बच्चों को विज्ञान अनुभव लिखने और दीवार पत्रिका में प्रदर्शित करने के अवसर, छोटे प्रयोग एवं विज्ञान कहानियों का साझा करना तथा वर्ष में कम से कम एक-दो विज्ञान उत्सव/विज्ञान मेला आयोजित करना शामिल है। इस लक्ष्य को शिक्षकों, संकुल समन्वयकों (CAC), प्रधानपाठकों एवं शैक्षिक सहयोगी दल के सामूहिक प्रयास से पूरा करने पर सहमति बनी तथा 30 सितम्बर तक विकासखंड की सभी पूर्व माध्यमिक शालाओं में विज्ञान कॉर्नर स्थापित किए जाने का निर्णय लिया गया।

विज्ञान शिक्षकों का एक व्हाट्सएप समूह भी बनाया गया है, जिसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 के अनुरूप बाल-केंद्रित एवं गतिविधि आधारित शिक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा। शिक्षक अपने विद्यालयों में बच्चों के साथ किए जा रहे प्रयोगों, गतिविधियों और नवाचारों को साझा करेंगे तथा एक-दूसरे से सीखने का वातावरण विकसित करेंगे। कार्यशाला में यह भी बताया गया कि 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर विकासखंड के सभी पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में विज्ञान मेला आयोजित किया जाएगा । जिसमें शिक्षक, संकुल समन्वयक एवं प्रधानपाठकों का सहयोग रहेगा और विद्यालयों में विज्ञान के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार किया जाएगा।
एम.टी. के रूप में देवकुमार सूर्यवंशी, घनश्याम डड्सेना एवं दीपक सिदार ने शिक्षकों को विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया। कार्यक्रम के आयोजन में अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन का सहयोग रहा।विज्ञान मेले से विद्यालयों में बच्चों के बीच जिज्ञासा, प्रयोगशीलता और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा मिलेगा ।



