कवर्धा में राशन दुकानों पर मिलर का मिलावटी चावल! इल्ली, कीड़े और कंकड़ खपा रहे हैं, विभाग बना मूकदर्शक

कवर्धा
कबीरधाम जिले में गरीबों के थाली तक पहुंचने वाला सरकारी चावल अब स्वास्थ्य के लिए खतरा बनता जा रहा है। जिले की करीब 514 राशन दुकानों के माध्यम से लगभग 2 लाख 95 हजार से अधिक कार्डधारकों को हर महीने सैकड़ों मैट्रिक टन चावल वितरित किया जा रहा है। लेकिन बीते कुछ महीनों से उपभोक्ताओं के हाथ जो चावल पहुंच रहा है, वह खाने लायक नहीं रह गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि राशन दुकानों में वितरित हो रहे चावल में इल्ली, कीड़े, धूल और कंकड़ तक मिल रहे हैं। कई जगहों पर तो कटे-फटे बारदाने में हाथ से सिले हुए बोरे भी दिए जा रहे हैं, जिनमें नमी और सड़न की बदबू महसूस की जा सकती है।


सरकार के नियमों के अनुसार, राइस मिलर को प्रत्येक क्विंटल धान की कुटाई से 65 किलो चावल देना होता है, जिसके एवज में उसे कुटाई कमीशन और सप्लाई शुल्क दिया जाता है। लेकिन यह जिम्मेदारी निभाने के बजाय कुछ मिलर घटिया क्वालिटी का चावल सप्लाई कर रहे हैं।
उपभोक्ताओं का आरोप है कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग और बेयरहाउस प्रबंधन ने इस पर आंख मूंद ली है। वे “गांधी के तीन बंदर” बनकर सब कुछ देख-सुनकर भी अनदेखा कर रहे हैं।



