
रिपोर्टर-जय ठाकुर/लोकेशन-सरगुजा (अंबिकापुर)
सरगुजा जिले के रसोईया कर्मी अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश रसोईया विकास महासंघ के बैनर तले इस हड़ताल की शुरुआत आज अंबिकापुर में की गई। रसोईया कर्मियों का कहना है कि वर्तमान में उन्हें मात्र 66 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से वेतन मिलता है, जो महीने में लगभग 2,000 रुपये ही बैठता है। इतने कम वेतन में परिवार का भरण-पोषण करना बेहद मुश्किल हो गया है।



रसोईया कर्मियों की प्रमुख मांगों में सभी रसोइयों को नियमित करना, कलेक्टर दर पर वेतन भुगतान करना और किसी भी कर्मी को काम से बाहर न निकाला जाना शामिल है। कर्मियों का कहना है कि वे सुबह 9:30 बजे से लेकर दोपहर 3:30 बजे तक अपनी सेवाएं देते हैं, इसके बावजूद उन्हें सम्मानजनक वेतन नहीं मिल रहा।
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी रसोईया कर्मियों ने हड़ताल की थी, जिसके बाद 500 रुपये मासिक वेतन वृद्धि की गई थी। वहीं वर्तमान भाजपा सरकार ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में 50 प्रतिशत वेतन वृद्धि का वादा किया था, लेकिन अब तक वह वादा पूरा नहीं हुआ है।
हड़ताल के चलते जिले के कई स्कूलों में बच्चों को मध्यान भोजन नहीं मिल पा रहा है, जिससे छात्र-छात्राओं और अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अब देखना होगा कि सरकार रसोईया कर्मियों की इन जायज मांगों पर क्या निर्णय लेती है। फिलहाल, सरगुजा जिले में सभी रसोईया कर्मी हड़ताल पर डटे हुए हैं।




