
लोकेशन: सूरजपुर, छत्तीसगढ़ /रिपोर्टर: सुरेन्द्र साहू
बाल विवाह एक सामाजिक कुरीति ही नहीं, बल्कि कानूनन अपराध भी है। बावजूद इसके, कई जगहों पर आज भी कम उम्र में शादियां कर दी जाती हैं, जिसका खामियाजा नाबालिगों को भुगतना पड़ता है। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में प्रशासन लगातार इस पर सख्ती बरत रहा है। नतीजा यह है कि बीते चार महीनों में 40 बाल विवाह समय रहते रोके गए हैं। खास बात यह है कि अक्षय तृतीया जैसे शुभ मुहूर्त पर भी प्रशासन की मुस्तैदी से 14 बाल विवाह रुकवाए गए।



सूरजपुर जिले में जनवरी 2026 से अब तक 40 बाल विवाह के मामले सामने आए, जिन्हें समय रहते रोक दिया गया। इनमें से सिर्फ अक्षय तृतीया के तीन से चार दिनों के भीतर ही 14 बाल विवाह रोकने में सफलता मिली।
यह आंकड़े जहां एक ओर समाज में अब भी जारी इस कुरीति की ओर इशारा करते हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की सक्रियता और जागरूकता अभियानों की सफलता भी दिखाते हैं।



कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन ने बाल विवाह रोकने के लिए टास्क फोर्स गठित किया है, जिसमें तहसीलदार, महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस, चाइल्ड लाइन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और ग्राम पंचायत सचिव शामिल हैं।
अब इन मामलों में जिला न्यायालय के साथ समन्वय कर आगे कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
बाल संरक्षण अधिकारी मनोज जायसवाल के अनुसार, व्यक्तिगत सूत्रों से भी जानकारी जुटाकर समय रहते हस्तक्षेप किया जाता है, हालांकि इस दौरान कई सामाजिक चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है।




जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन अजय मरकाम का कहना है कि कम उम्र में शादी और गर्भावस्था मां और बच्चे दोनों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। कई मामलों में मातृ मृत्यु तक हो जाती है, जबकि बच्चों में कुपोषण और कम आयु जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं।
वहीं समाजसेवियों और युवाओं का भी मानना है कि बाल विवाह को बढ़ावा नहीं देना चाहिए और प्रशासन के प्रयासों में समाज को सहयोग करना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित किया जा सके।









