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अजिंक्य रहाणे ने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से लिया संन्यास, 20 साल के सफर पर लगाया विराम; बोले- ‘आपके दिलों में कभी नहीं हारा’

भारतीय क्रिकेट के भरोसेमंद टेस्ट बल्लेबाजों में शुमार अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और सभी प्रारूपों से संन्यास का ऐलान कर दिया है। 38 साल की उम्र में ‘कैप नंबर 278’ ने भावुक संदेश के साथ अपने करीब दो दशक लंबे क्रिकेट सफर को विराम दिया। रहाणे ने सोशल मीडिया पर लिखा, “Thank you for all the love and support over the years. Forever grateful.”

रहाणे के संन्यास के साथ भारतीय क्रिकेट के उस दौर का भी अंत हो गया, जिसमें शोर कम था, लेकिन जिम्मेदारी, धैर्य और प्रदर्शन हमेशा सबसे आगे रहे।

‘हर शुरुआत का एक अंत होता है’

रहाणे ने अपने संदेश में कहा कि संन्यास का फैसला किसी मजबूरी की वजह से नहीं, बल्कि उन्हें लगा कि अब क्रिकेट से आगे बढ़ने का सही समय आ गया है। उन्होंने जीवन के उस सच का जिक्र किया कि हर शुरुआत का एक अंत होता है।

उन्होंने अपने बचपन को याद करते हुए बताया कि डोंबिवली से मुंबई जाकर क्रिकेट खेलने वाले एक छोटे लड़के का सपना सिर्फ भारतीय टीम की कैप पहनना था। जब यह सपना पूरा हुआ तो उन्होंने हर दिन, हर पारी और हर मौके पर देश के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की।

टीम और देश को हमेशा रखा सबसे ऊपर

रहाणे ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत उपलब्धियों से ज्यादा टीम और देश को महत्व दिया। प्रथम श्रेणी क्रिकेट से लेकर भारतीय टीम तक करीब 20 वर्षों के सफर को उन्होंने गर्व का विषय बताया।

भारतीय क्रिकेट के लिए उनके योगदान में कई यादगार पल शामिल रहे। मेलबर्न टेस्ट का ऐतिहासिक शतक, 2020-21 में ऑस्ट्रेलिया में भारत की ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत और लॉर्ड्स की यादगार पारी उनके करियर के खास अध्यायों में गिनी जाती हैं।

खास बात यह रही कि रहाणे ने कई मुश्किल मौकों पर टीम की जिम्मेदारी संभाली और अपने शांत स्वभाव के साथ प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

संन्यास के बाद भी क्रिकेट से रिश्ता रहेगा

रहाणे ने साफ किया कि क्रिकेट से उनका रिश्ता संन्यास के साथ खत्म नहीं होगा। वह आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के साथ अपना अनुभव और खेल के संस्कार साझा करना चाहते हैं।

उन्होंने बीसीसीआई, मुंबई क्रिकेट, अपने साथी खिलाड़ियों, कोचों, आईपीएल फ्रेंचाइजी, पत्नी राधिका, परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों का भी आभार जताया।

‘क्रिकेट ने मुझे कई बार हराया, लेकिन एक जगह कभी नहीं हारा’

यानी मैदान पर जीत और हार खेल का हिस्सा रही। रहाणे के करियर में मुश्किल दौर भी आए और गलतियां भी हुईं, लेकिन उनका मानना है कि प्रशंसकों के दिलों में उन्हें कभी हार का सामना नहीं करना पड़ा।

यही शायद अजिंक्य रहाणे के करीब 20 साल लंबे क्रिकेट करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि और सबसे भावुक विदाई है।

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