आजादी के 80वें वर्ष में साइबर अपराध से नई आजादी की पहल

देश आजादी का 80वां वर्ष मना रहा है और इसी मौके पर छत्तीसगढ़ पुलिस ने लोगों को साइबर अपराध के चंगुल से बचाने के लिए एक नई पहल शुरू की है। साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल, UPI फ्रॉड और सोशल मीडिया के जरिए होने वाले अपराधों के खिलाफ अब पुलिस सीधे लोगों के बीच पहुंचकर जागरूकता अभियान चलाएगी। इसी कड़ी में जांजगीर-चांपा जिले में भी “साइबर जागृति अभियान” का शुभारंभ किया गया है।
15 अगस्त से शुरू होकर 2 अक्टूबर गांधी जयंती तक चलने वाले इस सात सप्ताह के अभियान के दौरान जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
स्कूल और कॉलेजों में छात्र-छात्राओं को डिजिटल सुरक्षा और साइबर अपराध से बचाव के तरीके बताए जाएंगे। वहीं बैंकों और वित्तीय संस्थानों में UPI फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा।
वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट और फर्जी कॉल से सावधान रहने की जानकारी दी जाएगी, जबकि युवाओं को जॉब फ्रॉड, फिशिंग और सोशल मीडिया से जुड़े साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
पुलिस के इस अभियान में “साइबर जागृति की एक सेल्फी” भी खास आकर्षण होगी। QR कोड स्कैन कर लोग साइबर जागरूकता संदेश के साथ सेल्फी लेकर उसे सोशल मीडिया पर शेयर कर सकेंगे। इसका उद्देश्य साइबर सुरक्षा के संदेश को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है।
जिला पुलिस की टीमें सार्वजनिक स्थानों, चौक-चौराहों, बाजारों और गांवों में पोस्टर-बैनर के माध्यम से भी साइबर अपराध से बचाव का संदेश देंगी। सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए लोगों को अभियान से जोड़ा जाएगा।
पुलिस का मानना है कि साइबर अपराध से बचाव के लिए जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण हथियार है। आजादी का मतलब केवल बाहरी बंधनों से मुक्ति नहीं, बल्कि ठगी और साइबर अपराध के डर से भी आजादी है।

बाइट:
विजय पांडेय, पुलिस अधीक्षक, जांजगीर-चांपा आउट:
आजादी के 80वें वर्ष में छत्तीसगढ़ पुलिस का संदेश साफ है—सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और साइबर अपराध से आजादी की इस मुहिम का हिस्सा बनें।




