
रायपुर : रायगढ़ जिले के गढ़उमरिया और दरामुडा क्षेत्र में रंगटा संस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा एक बड़े औद्योगिक विस्तार का प्रस्ताव रखा गया है। कंपनी ने फेरो-अलॉय संयंत्र को एक एकीकृत स्टील प्लांट एवं 50 मेगावाट कैप्टिव पावर प्लांट में विस्तारित करने की योजना प्रस्तुत की है। इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹814.5 करोड़ बताई गई है।
किसी भी औद्योगिक परियोजना के लिए पहला और सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न होता है—क्या प्रस्तावित भूमि उस परियोजना के लिए पर्याप्त और तकनीकी रूप से सुरक्षित है?
यही प्रश्न इस लेख का विषय है।
EIA रिपोर्ट क्या कहती है?
रिपोर्ट के अनुसार:
वर्तमान संयंत्र क्षेत्रफल: 2.513 हेक्टेयर
प्रस्तावित विस्तार क्षेत्र: 8.516 हेक्टेयर
विस्तार के बाद कुल क्षेत्रफल: 11.029 हेक्टेयर।
इसी भूमि पर निम्नलिखित इकाइयाँ प्रस्तावित हैं—
DRI (स्पंज आयरन) संयंत्र
स्टील मेल्टिंग शॉप (SMS)
रोलिंग मिल
फेरो-अलॉय इकाई
पिग आयरन उत्पादन
सिंटर प्लांट
50 मेगावाट कैप्टिव पावर प्लांट
प्रोड्यूसर गैस प्लांट
मेटल रिकवरी प्लांट
स्लैग क्रशर
फ्लाई ऐश ब्रिक प्लांट।
पहला बड़ा सवाल
यदि एक ही परिसर में इतनी बड़ी औद्योगिक इकाइयाँ स्थापित की जानी हैं, तो क्या 11.029 हेक्टेयर भूमि वास्तव में पर्याप्त है?
रिपोर्ट में भूमि का उपयोग इस प्रकार बताया गया है—
संयंत्र एवं सुविधाएँ – 4.81 हेक्टेयर
कच्चा माल भंडारण – 1.025 हेक्टेयर
हरित पट्टी – 3.649 हेक्टेयर
सड़कें – 0.912 हेक्टेयर
जल भंडार – 0.196 हेक्टेयर
ठोस अपशिष्ट भंडारण – 0.087 हेक्टेयर
पार्किंग – 0.08 हेक्टेयर
प्रशासनिक भवन – 0.043 हेक्टेयर।
क्या यही पूरी तस्वीर है?
औद्योगिक सुरक्षा के विशेषज्ञ जानते हैं कि केवल मशीनों के लिए जगह होना पर्याप्त नहीं होता।
एक बड़े स्टील प्लांट में आवश्यक होते हैं—
अग्निशमन मार्ग
आपदा निकासी मार्ग
भारी वाहनों की आवाजाही
गैस पाइपलाइन सुरक्षा क्षेत्र
विद्युत सुरक्षा दूरी
विस्फोट जोखिम क्षेत्र
आपातकालीन एकत्रीकरण स्थल
सारांश रिपोर्ट में इनका विस्तृत सार्वजनिक विवरण दिखाई नहीं देता।
एक और महत्वपूर्ण तथ्य
रिपोर्ट के अनुसार हरित पट्टी 3.649 हेक्टेयर (33.1%) होगी।
यह पर्यावरणीय दृष्टि से सकारात्मक दावा है, लेकिन इससे एक नया प्रश्न भी उठता है।
यदि कुल भूमि का लगभग एक-तिहाई भाग हरित पट्टी के लिए सुरक्षित रहेगा, तो शेष भूमि पर इतनी बड़ी औद्योगिक संरचनाएँ, सड़कें, भंडारण क्षेत्र और सुरक्षा अवसंरचना किस प्रकार समाहित होगी?
भूमि की स्थिति भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं
रिपोर्ट के अनुसार:
कुल संयंत्र क्षेत्र 11.029 हेक्टेयर है।
10.989 हेक्टेयर निजी भूमि और 0.04 हेक्टेयर सरकारी भूमि है।
20 मार्च 2026 तक 10.572 हेक्टेयर भूमि कंपनी के कब्जे में है।
दूसरे स्थान पर रिपोर्ट यह भी बताती है कि विस्तार क्षेत्र की 0.457 हेक्टेयर निजी भूमि की खरीद तथा सरकारी भूमि के पट्टे की प्रक्रिया जारी है।
यह स्थिति यह प्रश्न उठाती है कि क्या अंतिम परियोजना लेआउट पूरी तरह निश्चित हो चुका है।
तकनीकी प्रश्न जो उत्तर मांगते हैं
प्रत्येक प्रस्तावित इकाई की पृथक भूमि आवश्यकता कितनी है?
क्या मास्टर लेआउट सार्वजनिक किया गया है?
क्या सभी इकाइयों के बीच आवश्यक सुरक्षा दूरी उपलब्ध है?
क्या अग्निशमन एवं आपदा निकासी योजना सार्वजनिक है?
क्या भविष्य में अतिरिक्त विस्तार के लिए भी इसी भूमि का उपयोग प्रस्तावित है?
जनता के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न
यह लेख परियोजना के पक्ष या विपक्ष का निर्णय नहीं देता।
यह केवल एक तथ्यात्मक प्रश्न उठाता है—
क्या इतनी बड़ी औद्योगिक परियोजना के लिए उपलब्ध भूमि, सुरक्षा, पर्यावरण और भविष्य के संचालन की दृष्टि से पर्याप्त सिद्ध होती है?
यदि इसका उत्तर “हाँ” है, तो उसका वैज्ञानिक और तकनीकी आधार भी सार्वजनिक होना चाहिए ताकि स्थानीय नागरिक, विशेषज्ञ और नियामक संस्थाएँ तथ्यों के आधार पर निर्णय ले सकें।
अगला भाग
“रूँगटा संस प्राइवेट लिमिटेड जनसुनवाई विशेष : EIA रिपोर्ट की परतें – भाग 2”
विषय: 95 KLD से 3125 KLD तक – पानी कहाँ से आएगा और केलो नदी पर कितना पड़ेगा दबाव?




