अजिंक्य रहाणे ने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट को कहा अलविदा, बोले- ‘क्रिकेट ने कई बार हराया, लेकिन आपके दिलों में कभी नहीं हारा’

भारतीय क्रिकेट के अनुभवी बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने गुरुवार, 30 जुलाई को क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास का ऐलान कर दिया। 38 वर्षीय रहाणे ने अपने विदाई संदेश में करीब 20 साल लंबे क्रिकेट सफर को याद किया। इस दौरान वह अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों को याद करते हुए भावुक हो गए।
रहाणे ने कहा कि जिंदगी की हर शुरुआत का एक अंत होता है और अब उन्हें लगता है कि आगे बढ़ने का यही सही समय है। उन्होंने कहा कि बल्लेबाजी की तरह जिंदगी में भी सही टाइमिंग बेहद मायने रखती है और अब उनके लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने का वक्त आ गया है।

डोंबिवली से शुरू हुआ था सफर, सपना था भारत की जर्सी पहनना
अपने विदाई संदेश में रहाणे ने अपने शुरुआती दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि वह डोंबिवली से लंबा सफर तय करके अभ्यास के लिए जाया करते थे। उस वक्त वह एक छोटे बच्चे थे, लेकिन आंखों में बड़ा सपना था—एक दिन भारतीय टीम की जर्सी पहनना और देश के लिए खेलना।
रहाणे ने कहा कि शुरुआती दिनों से लेकर अपने क्रिकेट करियर के आखिरी पड़ाव तक उन्होंने इस खेल को अपना सब कुछ दिया। हर दिन, हर पारी और बल्लेबाजी का हर मौका उनके लिए भारत की कैप पहनने के सपने को जीने का जरिया रहा।
उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा एक नियम का पालन किया—खुद से पहले देश और टीम को रखना।
‘इस खेल को पूरी ईमानदारी के साथ खेला’
रहाणे ने कहा कि उन्होंने क्रिकेट पूरी ईमानदारी के साथ खेला और हमेशा इस बात पर विश्वास किया कि अगर खिलाड़ी की नीयत सही हो तो क्रिकेट भी उसका साथ देता है।
फर्स्ट क्लास क्रिकेट में पदार्पण से लेकर भारतीय टीम तक के सफर को याद करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों में भारतीय क्रिकेट ने जबरदस्त तरक्की की है और इस बदलाव का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व की बात है।
‘भारतीय क्रिकेटर के रूप में यात्रा खत्म, लेकिन क्रिकेट से रिश्ता जारी रहेगा’
रहाणे ने साफ किया कि भारतीय क्रिकेटर के रूप में उनका अध्याय भले ही खत्म हो रहा है, लेकिन क्रिकेट के साथ उनका रिश्ता खत्म नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि वह आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों की मदद करना चाहते हैं। क्रिकेट से उन्होंने जो मूल्य और अनुभव सीखे हैं, उन्हें युवा खिलाड़ियों के साथ साझा करना चाहते हैं और खेल ने उन्हें जो कुछ दिया है, उसे किसी न किसी रूप में वापस करना चाहते हैं।
BCCI से लेकर पत्नी राधिका तक, सभी को कहा शुक्रिया
अपने विदाई संदेश में रहाणे ने BCCI, मुंबई क्रिकेट संघ (MCA), अपने साथी खिलाड़ियों, कोचों, IPL फ्रेंचाइजियों, पत्नी राधिका, परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों का आभार जताया।
उन्होंने खास तौर पर उन क्रिकेट फैंस को धन्यवाद दिया, जिन्होंने उनके अच्छे और बुरे दौर में उन पर भरोसा बनाए रखा।
‘अजिंक्य’ का मतलब अजेय, लेकिन क्रिकेट ने कई बार हराया
अपने विदाई संदेश के अंत में रहाणे ने सबसे भावुक बात कही। उन्होंने अपने नाम ‘अजिंक्य’ का अर्थ बताते हुए कहा कि इसका मतलब ‘अजेय’ होता है, लेकिन क्रिकेट ने उन्हें कई बार हार का सामना करना सिखाया।
एक क्रिकेटर के तौर पर सफलता से ज्यादा असफलताओं का सामना करना पड़ता है। रहाणे ने माना कि उनकी टीम मैच हारी, उनसे भी गलतियां हुईं, लेकिन एक जगह ऐसी रही जहां वह कभी नहीं हारे—अपने प्रशंसकों के दिलों में।
उन्होंने अपने प्रशंसकों के प्यार, विश्वास और समर्थन के लिए दिल से धन्यवाद कहा।
कैप नंबर 278 ने अब अपने क्रिकेट सफर पर विराम लगा दिया है। डोंबिवली से भारतीय टीम तक का सफर तय करने वाले रहाणे ने मैदान पर भले ही कई उतार-चढ़ाव देखे हों, लेकिन उनकी शांत शैली, टीम के प्रति प्रतिबद्धता और मुश्किल वक्त में जिम्मेदारी निभाने की क्षमता भारतीय क्रिकेट में लंबे समय तक याद की जाएगी।




