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Banking Rules 2026: 135 साल पुराना बैंकिंग कानून बदला, अब पुलिस सीधे मांग सकेगी बैंक अकाउंट की जानकारी, जानें 5 बड़े बदलाव

नई दिल्ली: संसद में हाल में बैंकिंग सेक्टर से जुड़ा एक कानून पास हुआ है। इसका नाम ‘ बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल 2026 ‘ है। इसने 135 साल पुराने ‘ बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट 1891 ‘ की जगह ली है। इस नए कानून ने जहां ग्राहकों को कई सुविधाएं दी हैं तो वहीं कुछ विवाद भी सामने आ रहे हैं। पुराने कानून को उस दौर में बनाया गया था जब बैंकिंग रिकॉर्ड कागजी रजिस्टरों और बही-खातों में रखे जाते थे।

नए कानून का मुख्य उद्देश्य डिजिटल और ऑनलाइन बैंकिंग के दौर में बैंक रिकॉर्ड्स को अदालती प्रक्रियाओं में कानूनी सबूत के रूप में पेश करने के नियमों को आधुनिक बनाना है। हालांकि, ग्राहकों के डेटा और प्राइवेसी से जुड़े कुछ प्रावधानों को लेकर चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। ग्राहकों को सबसे ज्यादा चिंता उनकी बैंक अकाउंट डिटेल्स को लेकर है, जिसे अब पुलिस का कोई भी अधिकारी बैंक से आसानी से ले सकेगा।

जानें नए कानून के 5 सबसे अहम बदलाव

1. डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक बैंक रिकॉर्ड्स को कानूनी सबूत की मान्यता

  • नए नियम के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल और क्लाउड-बेस्ड बैंक रिकॉर्ड्स को कानूनी तौर पर ‘बैंकर्स बुक्स’ माना जाएगा।
  • अब बैंकों द्वारा इलेक्ट्रॉनिक रूप से रखे गए ट्रांजैक्शन डेटा को अदालत में सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा।
  • हालांकि, इसके लिए डेटा की सटीकता, सिस्टम की सुरक्षा और डेटा से छेड़छाड़ न होने जैसे नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।

2. मूल रिकॉर्ड की जगह सर्टिफाइड कॉपी का इस्तेमाल

  • अदालती कार्यवाही के लिए बैंकों को अपने मूल फिजिकल या डिजिटल सिस्टम को पेश करने की जरूरत नहीं होगी। केवल प्रमाणित कॉपी या एक्सट्रैक्ट ही पर्याप्त होगा।
  • डिजिटल रिकॉर्ड्स के मामले में बैंकों को एक तकनीकी प्रमाणपत्र देना होगा, जो यह पुष्टि करेगा कि सिस्टम सही काम कर रहा था और डेटा सुरक्षित है।

3. बैंक अकाउंट का ब्योरा मांगने का अधिकार

  • इस बदलाव पर कुछ विवाद पैदा हो रहा है। नए नियम के मुताबिक पुलिस या जांच अधिकारी किसी मामले की जांच के लिए बिना अदालती आदेश के बैंक से सीधे ग्राहक के खाते की जानकारी ले सकेंगे। हालांकि अधिकरी एक निश्चित रैंक या एसपी स्तर से ऊपर के होने चाहिए।
  • बैंक को ग्राहक को इसकी जानकारी देनी होगी, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा, संगठित वित्तीय अपराध या जारी जांच जैसे मामलों में ग्राहक को सूचित न करने की छूट दी गई है।
  • नागरिक अधिकारों से जुड़े समूह इस प्रावधान पर प्राइवेसी को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

4. बैंक अधिकारियों को बार-बार कोर्ट के चक्कर काटने से राहत

  • नए नियम के मुताबिक अगर कोई कानूनी मामला बैंक से सीधे जुड़ा नहीं है, तो बैंक अधिकारियों को मूल दस्तावेज पेश करने या गवाही देने के लिए बार-बार अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
  • हालांकि अगर अदालत को बैंक रिकॉर्ड की सत्यता पर संदेह होता है या कोई विशेष कारण बनता है, तभी अधिकारियों को बुलाया जा सकेगा।

5. अन्य वित्तीय संस्थानों तक दायरे का विस्तार

  • नया नियम में केंद्र सरकार को यह अधिकार दिया गया है कि वह इस कानून के प्रावधानों को बैंकिंग के अलावा अन्य वित्तीय संस्थाओं पर भी लागू कर सकती है।
  • इसके मुताबिक भविष्य में नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs), पेंशन फंड्स, बीमा कंपनियों और अन्य रेगुलेटेड वित्तीय संस्थानों को भी इस कानून के तहत लाया जा सकेगा।
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