
सावन के पावन महीने में भगवान शिव की भक्ति में पूरा क्षेत्र डूबा हुआ है। सक्ती जिले के प्रसिद्ध तुर्रीधाम में सावन के सोमवार पर आस्था का सैलाब देखने को मिला। यहां स्वयंभू शिवलिंग पर पहाड़ से निकलने वाली प्राकृतिक जलधारा लगातार गिरती है, जिसे श्रद्धालु भगवान शिव का प्राकृतिक जलाभिषेक मानते हैं।

तुर्रीधाम की सबसे खास बात यहां का स्वयंभू शिवलिंग और उस पर अनवरत गिरती जलधारा है। मंदिर के गर्भगृह में मौजूद यह जलधारा लगातार शिवलिंग पर गिरती रहती है। खास बात यह है कि जलधारा पहाड़ के किस स्थान से निकलती है, इसका रहस्य आज भी बना हुआ है।
सावन के सोमवार को दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु तुर्रीधाम पहुंचे। भक्तों ने भगवान शिव के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और अपनी मनोकामनाओं के लिए प्रार्थना की। वहीं मंदिर परिसर में लगे मेले में भी श्रद्धालुओं की अच्छी भीड़ देखने को मिली।
तुर्रीधाम का प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक आस्था का अनोखा संगम इसे क्षेत्र के प्रमुख शिवधामों में विशेष पहचान दिलाता है।


बाईट 01: जयप्रकाश गुप्ता, श्रद्धालु, रायपुर
बाईट 02: दुर्गेश यादव, श्रद्धालु
सावन के सोमवार पर तुर्रीधाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। प्राकृतिक जलधारा से होता शिवलिंग का जलाभिषेक यहां आने वाले भक्तों के लिए आस्था और आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।




