चीनी खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर! सरकार ने बदले आयात नियम, कीमतों पर पड़ सकता है असर

आगामी त्योहारी सीजन में चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने कच्ची चीनी के आयात नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियम के तहत अब ड्यूटी-फ्री कच्ची चीनी आयात करने वाले व्यापारियों को तय समयसीमा के भीतर इसकी प्रोसेसिंग कर भारतीय बाजार में बिक्री करनी होगी।
60 दिनों के भीतर बेचनी होगी चीनी
नए नियम के मुताबिक, आयातकों को भारत के बंदरगाह पर चीनी पहुंचने और ‘बिल ऑफ एंट्री’ दाखिल होने के दो महीने यानी 60 दिनों के भीतर कच्ची चीनी को रिफाइंड कर बाजार में बेचना अनिवार्य होगा।
सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब त्योहारी सीजन से पहले चीनी की कीमतों में तेजी और जमाखोरी को लेकर चिंता जताई जा रही थी।
पहले क्या था नियम?
इससे पहले सरकार ने टैरिफ-रेट कोटा (TRQ) योजना के तहत 10 लाख टन कच्ची चीनी को बिना कस्टम ड्यूटी भारत लाने की अनुमति दी थी। पुराने नियम के तहत आयात की गई चीनी को रिफाइंड कर बाजार में बेचने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर तय थी।
सरकार के मुताबिक, इस व्यवस्था में कुछ व्यापारी चीनी को लंबे समय तक स्टॉक करके रख सकते थे। अब इस व्यवस्था को बदलकर रोलिंग सिस्टम लागू किया गया है। यानी जिस तारीख को चीनी भारत पहुंचेगी, उसी के आधार पर 60 दिनों की समयसीमा तय होगी।
कीमतों पर क्या होगा असर?
चीनी उद्योग से जुड़े जानकारों के मुताबिक, हालिया तेजी का एक कारण जमाखोरी और सट्टेबाजी भी हो सकती है। नए नियम से आयातित चीनी की बाजार में नियमित सप्लाई सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
सरकार का उद्देश्य है कि त्योहारों के दौरान बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहे और जमाखोरी पर लगाम लगने से कीमतों में स्थिरता आए। हालांकि, वास्तविक खुदरा कीमतों पर असर बाजार की मांग और सप्लाई पर निर्भर करेगा।



