
लोकेशन: कोरबा / रिपोर्टर : सरोज रात्रे
कोरबा जिले के वनांचल क्षेत्र साजापानी में विकास कार्यों की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। यहां करीब 5 लाख रुपये की लागत से बनी सड़क महज पांच साल में ही पूरी तरह उखड़ गई है। सड़क के साथ पुलिया में भी दरारें आ गई हैं, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि DMF फंड की राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई और निर्माण कार्य में भारी लापरवाही बरती गई।

साजापानी गांव में बनी सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। जगह-जगह गड्ढे और कीचड़ जमा है, जबकि पुलिया में आई दरारें हादसे का खतरा बढ़ा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के समय गुणवत्ता का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा गया, जिसका नतीजा अब सामने आ रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क कुछ ही वर्षों में जवाब दे गई। बरसात के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते हैं और गांव का संपर्क टूटने की स्थिति बन जाती है।

मामले को लेकर छत्तीसगढ़ मानव अधिकार जे.जे.एफ. ने कलेक्टर से शिकायत कर पूरे निर्माण कार्य की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि जनता के पैसों का सही उपयोग नहीं हुआ और ग्रामीणों को विकास के नाम पर बदहाल सड़क मिली।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर बरसात से पहले सड़क का निर्माण और मरम्मत नहीं कराई गई, तो गांव का संपर्क पूरी तरह बाधित हो सकता है। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जनता के पैसों से बना विकास इतना जल्दी क्यों बिखर गया।




