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सिंघल स्टील प्राइवेट लिमिटेड रायगढ़ की जनसुनवाई विशेष

EIA रिपोर्ट की परतें – भाग 1

क्या 30.705 हेक्टेयर भूमि में इतना बड़ा औद्योगिक परिसर सुरक्षित रूप से स्थापित किया जा सकता है?
रायपुर : 3 जुलाई 2026 को सिंघल स्टील प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित एकीकृत इस्पात परियोजना की पर्यावरणीय जनसुनवाई आयोजित की जाएगी। यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि स्थानीय नागरिकों के लिए अपने जल, जंगल, जमीन, पर्यावरण और भविष्य से जुड़े प्रश्न उठाने का संवैधानिक अवसर है।

इसी उद्देश्य से “सिंघल स्टील प्राइवेट लिमिटेड की जनसुनवाई विशेष : EIA रिपोर्ट की परतें” शीर्षक से यह श्रृंखला प्रारंभ की जा रही है। इस श्रृंखला में EIA रिपोर्ट के प्रत्येक महत्वपूर्ण पहलू का सरल भाषा में तकनीकी विश्लेषण प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि आम नागरिक भी रिपोर्ट में किए गए दावों को समझ सकें और सूचित निर्णय ले सकें।

प्रस्तावित परियोजना क्या है?

प्रस्तावित परियोजना एक बहु-इकाई एकीकृत इस्पात परिसर है, जिसमें लौह अयस्क बेनिफिसिएशन प्लांट, पेलेट प्लांट, सिंटर प्लांट, कोक ओवन, ब्लास्ट फर्नेस, डीआरआई इकाइयाँ, स्टील मेल्टिंग शॉप, फेरो एलॉय यूनिट, कोल वाशरी तथा 160 मेगावाट कैप्टिव पावर प्लांट सहित अनेक औद्योगिक इकाइयाँ स्थापित करने का प्रस्ताव है।

ऐसी परियोजनाएँ केवल एक कारखाना नहीं होतीं, बल्कि इनके साथ भारी जल उपयोग, बड़े पैमाने पर कच्चे माल का परिवहन, ऊर्जा उत्पादन, औद्योगिक अपशिष्ट और दीर्घकालिक पर्यावरणीय प्रभाव भी जुड़े होते हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक के लिए EIA रिपोर्ट को समझना आवश्यक है।

आज का सवाल

क्या 30.705 हेक्टेयर भूमि में इतना बड़ा औद्योगिक परिसर सुरक्षित रूप से स्थापित किया जा सकता है?

EIA रिपोर्ट के अनुसार परियोजना के लिए कुल 30.705 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित है। इसी भूमि पर अनेक भारी औद्योगिक इकाइयाँ स्थापित की जानी हैं।

रिपोर्ट में लगभग 10.534 हेक्टेयर क्षेत्र को हरित पट्टी (Green Belt) के रूप में विकसित करने का भी उल्लेख है। इसका अर्थ है कि शेष लगभग 20 हेक्टेयर भूमि में उत्पादन इकाइयाँ, कच्चा माल भंडारण, कोयला यार्ड, स्लैग प्रबंधन, आंतरिक सड़कें, अग्निशमन मार्ग तथा अन्य आवश्यक सुविधाएँ विकसित की जाएँगी।

यहीं से तकनीकी प्रश्न शुरू होता है

कोक ओवन, ब्लास्ट फर्नेस, गैस प्रणाली, कोयला भंडारण और बिजली उत्पादन जैसी इकाइयों वाले परिसर में पर्याप्त सुरक्षा दूरी, आपातकालीन पहुँच मार्ग और दुर्घटना प्रबंधन व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

क्या उपलब्ध भूमि में इन सभी व्यवस्थाओं के लिए पर्याप्त स्थान सुनिश्चित किया गया है?

क्या विस्तृत प्लांट लेआउट और सुरक्षा दूरी का स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है?

क्या स्थानीय नागरिकों को यह जानकारी दी गई है कि किसी औद्योगिक दुर्घटना की स्थिति में सुरक्षित निकासी की व्यवस्था क्या होगी?

जनता के लिए तीन सवाल

  1. क्या परियोजना का विस्तृत प्लांट लेआउट सार्वजनिक किया गया है?
  2. क्या सभी प्रमुख इकाइयों के बीच सुरक्षा दूरी का स्वतंत्र तकनीकी मूल्यांकन किया गया है?
  3. क्या जनसुनवाई में स्थानीय नागरिकों को आपदा प्रबंधन एवं निकासी योजना की जानकारी दी जाएगी?

अगले भाग में पढ़िए

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