कोरबाछत्तीसगढ़

कोरबा में हाथियों का उत्पात जारी, 53 हाथियों के चार झुंड से ग्रामीणों में दहशत; धान की फसल बर्बाद

कोरबा जिले में हाथियों का आतंक लगातार जारी है। धरमजयगढ़ वन मंडल से पहुंचे दो दंतैल हाथियों ने कुदमुरा रेंज के गीतकुंवारी गांव में किसानों की तैयार धान की फसल को रौंदकर भारी नुकसान पहुंचाया है। वहीं जिले में कुल 53 हाथी चार अलग-अलग झुंडों में विचरण कर रहे हैं। हाथियों की लगातार आवाजाही से कुदमुरा, जटगा और पसान क्षेत्र के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।

गुरुवार रात दो दंतैल हाथी गीतकुंवारी गांव में घुस आए और खेतों में खड़ी धान की फसल को रौंद दिया। किसानों के मुताबिक फसल कटाई के लिए पूरी तरह तैयार थी, लेकिन हाथियों ने कई एकड़ फसल को बर्बाद कर दिया। ग्रामीणों ने शोर मचाकर और मशाल जलाकर हाथियों को भगाने की कोशिश की, लेकिन तब तक फसल को काफी नुकसान हो चुका था।

वहीं कटघोरा वन मंडल के जटगा रेंज स्थित मेउड़ पहाड़ पर 48 हाथियों का बड़ा दल डेरा जमाए हुए है। वन विभाग के मुताबिक, पांच हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैले मेउड़ पहाड़ पर हाथियों के लिए पर्याप्त भोजन और पानी उपलब्ध है। इसी वजह से गर्मी के मौसम में हाथियों का यह दल हर साल करीब ढाई से तीन महीने तक इस इलाके में रहता है।

हालांकि भोजन और पानी की तलाश में कभी-कभी हाथी पहाड़ से उतरकर गांवों की ओर पहुंच जाते हैं। हाथियों की लगातार आवाजाही से कुदमुरा, जटगा और पसान क्षेत्र के ग्रामीणों में डर बना हुआ है। रात होते ही लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं, वहीं खेतों की रखवाली करना भी ग्रामीणों के लिए चुनौती बन गया है।

वन विभाग की टीम लगातार गांवों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क कर रही है। हाथी मित्र दल भी हाथियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। वहीं मेउड़ पहाड़ पर मौजूद 48 हाथियों के दल की ड्रोन के जरिए निगरानी की जा रही है, ताकि हाथियों को रिहायशी इलाकों में आने से रोका जा सके।

वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथी दिखाई देने पर तत्काल विभाग को सूचना दें। हाथियों के करीब जाने, उन्हें छेड़ने या भगाने की कोशिश न करें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें। विभाग की ओर से फसल नुकसान का आकलन कर मुआवजा प्रकरण तैयार किया जा रहा है।

फिलहाल कोरबा में हाथियों की मौजूदगी ने वन विभाग के साथ-साथ ग्रामीणों की चिंता भी बढ़ा दी है। वन विभाग की टीमें लगातार निगरानी और जागरूकता अभियान चला रही हैं, ताकि इंसान और हाथियों के बीच किसी तरह का टकराव न हो और किसानों को हुए नुकसान का नियमानुसार मुआवजा मिल सके।

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