‘भारत की तरह पाकिस्तान में सड़कों पर आएं Gen-Z’, शहबाज के दुश्मन अल्ताफ हुसैन CJP के हुए मुरीद

लंदन/इस्लामाबाद: शहबाज सरकार के सबसे बड़े विरोधियों में से एक अल्ताफ हुसैन ने जुल्म खत्म करने के लिए पाकिस्तान के Gen-Z से सड़कों पर उतरने का आह्वान किया है। उन्होंने लंदन से एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पाकिस्तान के युवाओं से दुनियाभर में हो रहे प्रदर्शनों से सीख लेने की अपील की है। उन्होंने लिखा है ‘पाकिस्तान की हालत बहुत नाजुक है। हमें एकजुट होने, गहराई से सोचने और शासक वर्ग और सेना की सख्त पकड़ से देश को आजाद कराने के लिए कड़ा संघर्ष करने को तैयार रहने की जरूरत है।’
उन्होंने एक्स पर जारी एक बयान में लिखा है ‘अन्याय और दमन के मौजूदा सिस्टम को खत्म करने के लिए पाकिस्तान के युवाओं खासकर ‘जेनरेशन Z’ को आगे आना होगा। जैसे दुनिया भर में बदलाव के लिए आंदोलन हुए हैं वैसे ही पाकिस्तान के युवाओं को अलग-अलग बैकग्राउंड के लोगों के साथ मिलकर बदलाव लाना होगा और देश को नेताओं की पकड़ से आजाद कराना होगा।’
अल्ताफ हुसैन की पाकिस्तान के युवाओं से अपील
आपको बता दें कि अल्ताफ हुसैन पाकिस्तान के एक प्रमुख नेता हैं जिन्हें देश से भागना पड़ा। वो मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) के संस्थापक थे। इनकी राजनीति मुख्य रूप से ‘मुहाजिर’ समुदाय जो 1947 में भारत के विभाजन के बाद पाकिस्तान जाकर बसे उर्दू भाषी मुस्लिम के अधिकारों और उनके हितों के इर्द-गिर्द केंद्रित रही है। इनके पिता मूल रूप से भारत के उत्तर प्रदेश (आगरा) के रहने वाले थे।
उन्होंने लिखा है ‘पाकिस्तान के युवाओं को एकजुट होकर देश की व्यवस्था बदलने और अन्यायपूर्ण व्यवहार और दमन को खत्म करने के लिए मिलकर प्रयास करना चाहिए। अगर वे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शनकारियों की तरह पुलिस की कार्रवाई, गैस हमलों, गिरफ्तारियों और बलिदानों का सामना करने को तैयार हैं तो पाकिस्तान की सबसे ताकतवर ताकतों के पास भी झुकने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा।’
अल्ताफ हुसैन ने लिखा है ‘ऐसे आंदोलन के बिना जड़ जमा चुके भ्रष्ट सिस्टम को खत्म करना और पाकिस्तान की तरक्की और स्थिरता हासिल करना बहुत मुश्किल लगता है। अगर लोग सिर्फ नारों और भाषणों पर ही निर्भर रहेंगे तो कुछ नहीं बदलेगा।’ उन्होंने लिखा है कि पाकिस्तान में हालात ऐसे हो गए हैं कि न्याय चाहने वाले आम आदमी के पास कोई विकल्प नहीं बचा है। यहां तक कि जब लोग निचली अदालतों के बजाय ऊपरी अदालतों में जाते हैं तो यह आरोप लगाया जाता है कि हाई कोर्ट के जजों पर सत्ता में बैठे लोगों का दबाव होता है ताकि वे ऐसे फैसले लें जिनसे वे खुश हों।
इमरान खान के लिए उठाई आवाज
अल्ताफ हुसैन ने इसके अलावा अपने पोस्ट में इमरान खान के लिए भी आवाज उठाई है। उन्होंने लिखा है ‘इमरान खान तीन साल से जेल में हैं। हाई कोर्ट के साफ आदेशों के बावजूद कहा जाता है कि उनके वकीलों को उनसे मिलने नहीं दिया गया। आरोप है कि हिरासत के दौरान उनकी एक आंख की रोशनी चली गई है लेकिन फिर भी उन्हें कोर्ट के सामने पेश नहीं किया गया। क्या ऊपरी अदालतों के जजों को इस मामले के बारे में पता नहीं है? मुझे लगता है कि 9 मई, 2023 की घटनाओं के सिलसिले में इमरान खान को दी गई सजा भी अनुचित थी।’




