टेक्नोलॉजी

Google ने वापस लिया गूगल अर्थ का एआई इमेज फीचर, लेकिन क्यों?

गूगल ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अपने एआई इमेज जनरेशन फीचर को गूगल अर्थ से हटा दिया है. गूगल ने यह फैसला एक भारी विरोध के बाद लिया है, क्योंकि इस फीचर से नकली सैटेलाइट पिक्चर्स बनाई जा सकती थीं. आइए इस पूरी बात को आसान भाषा में समझते हैं.

गूगल ने कुछ दिन पहले ही गूगल अर्थ में एक नया फीचर लॉन्च किया था, जिसका नाम क्रिएट इमेज था. इस फीचर में गूगल की Nano Banana 2 नाम की एआई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया था. इसकी मदद से यूज़र किसी भी जगह पर ज़ूम करके, वहां की सैटेलाइट, हवाई और 3D मैपिंग पिक्चर्स के आधार पर सेंकड्स में नई पिक्चर्स बना सकते थे.

गूगल ने इसे इतिहास दिखाने और प्रॉपर्टी प्लानिंग जैसे कामों के लिए फायदेमंद बताया था, लेकिन जल्द ही यह बात सामने आई कि इस फीचर का गलत इस्तेमाल भी हो सकता है. लोग नकली और भरोसेमंद दिखने वाली सैटेलाइट पिक्चर्स बना सकते थे, जैसे किसी शहर में बम ब्लास्ट दिखाना, न्यूक्लियर साइट की नकली पिक्चर्स बनाना या फिर किसी जगह पर सैन्य ठिकाना यानी मिलिट्री बेस दिखाना.

गूगल के इस नए टूल पर जांचकर्ताओं और इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स ने गहरी चिंता जताई, क्योंकि गूगल अर्थ को दुनियाभर में सच जानने और फैक्ट्स की जांच करने के लिए एक भरोसेमंद जरिए माना जाता रहा है. डिजिटल टेस्ट के जानकार हेंक वैन एस ने भी इस पर कड़ा एतराज़ जताते हुए रिएक्शन दिया और कहा कि गूगल ने पिछले कई वर्षों की मेहनत से जो भरोसा लोगों के दिल और दिमाग में बनाया है, उसे इस फीचर ने एक झटके में खतरे में डाल दिया है.

गूगल के इस फीचर के विरोध में जैसे-जैसे आवाज़ बढ़ती गई, वैसे-वैसे गूगल ने एक्शन लेना भी शुरू किया. पहले गूगल ने सफाई दी कि इस फीचर से बनी हर पिक्चर में एक खास डिजिटल निशान यानी वाटरमार्क छिपा होता है, ताकि असली और नकली पिक्चर में फर्क किया जा सके. हालांकि, गूगल की इस सफाई को काफी नहीं माना गया.

दुनिया की बड़ी न्यूज़ एजेंसी एएफपी ने खुद इस फीचर को टेस्ट किया और पेरिस में धमाका, ईरान में परमाणु ठिकाना, रूस में बम गिरने जैसी कई डरावनी दिखने वाली नकली पिक्चर्स बना दी. इसके अलावा बांग्लादेश में बाढ़ और अमेरिका-मेक्सिको बॉर्डर पर प्रवासियों की भीड़ जैसी झूठी तस्वीरें भी गूगल के इस फीचर की मदद से बनाई गई, जो कि नकली थीं.

गूगल ने वापस लिया फीचर

लंदन की एक संस्था के प्रमुख रॉस बर्ली ने कहा कि सैटेलाइट तस्वीरों पर भरोसा बनने में दशकों लगते हैं, लेकिन यह भरोसा एक ही रात में टूट सकता है. दुनियाभर से लगातार बढ़ने वाले भारी दबाव के बाद आखिरकार गूगल ने शुक्रवार को इस फीचर को गूगल अर्थ से पूरी तरह हटा दिया. कंपनी ने कहा कि वो इस फीचर के लिए स्ट्रॉग सिक्योरिटी रूल्स बनाएंगे और उसके बाद ही इसे दोबारा ला सकते हैं.

गूगल अर्थ के नए एआई टूल की वजह से दुनियाभर में हुए इस विवाद से एक बात तो बिल्कुल साफ समझ आती है कि एआई टेक्नोलॉजी जितनी उपयोगी है, उतनी ही खतरनाक भी साबित हो सकती है, अगर उसका सही इस्तेमाल न किया जाए तो.

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button