
इस बार रक्षाबंधन पर बहनों के स्नेह का प्रतीक राखी सिर्फ रिश्तों को ही नहीं जोड़ेगी, बल्कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की सांस्कृतिक पहचान को भी नई पहचान दिलाएगी। जिले की प्रसिद्ध विष्णु भोग धान और उसके चावल से तैयार की जा रही अनोखी राखियां बाजार में आकर्षण का केंद्र बनने जा रही हैं। बिहान योजना से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं पारंपरिक कला और स्थानीय संसाधनों का अनूठा मेल पेश कर रही हैं।

रंग-बिरंगे धागों और विष्णु भोग चावल को कलात्मक रूप देकर तैयार की जा रही ये राखियां स्थानीय विरासत की झलक भी अपने साथ लेकर चलेंगी। इस पहल को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने समूह की महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया, जिसके बाद वे पूरी तरह आत्मनिर्भर होकर राखियों का निर्माण कर रही हैं। तैयार राखियों की बिक्री के लिए रेलवे स्टेशन, कलेक्ट्रेट और विभिन्न ग्राम संगठन परिसरों में स्टॉल लगाए जा रहे हैं, ताकि राखियां सीधे ग्राहकों तक पहुंच सकें और महिलाओं को बेहतर आय मिल सके।
महिला समूहों का कहना है कि यह पहल उनके लिए केवल अतिरिक्त आय का जरिया नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और पहचान का माध्यम भी बनी है। स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने की इस कोशिश से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। जिला प्रशासन का मानना है कि यदि स्थानीय उत्पादों को इसी तरह प्रोत्साहन मिलता रहा तो न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि जीपीएम की विशेष पहचान भी प्रदेश और देशभर तक पहुंचेगी। इस रक्षाबंधन पर विष्णु भोग चावल से बनी राखियां भाई-बहन के अटूट प्रेम के साथ-साथ ‘‘वोकल फॉर लोकल‘‘ का भी संदेश देंगी।




