
बस्तर और आदिवासी क्षेत्रों में पदस्थ अतिथि शिक्षक संविलियन, सेवा सुरक्षा, समान काम के बदले समान वेतन और मानदेय बढ़ाने जैसी मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे। बुधवार को पुलिस और प्रशासन की टीम बड़ी संख्या में जवानों के साथ धरना स्थल पहुंची। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें शाम तक धरना खत्म करने की चेतावनी दी गई थी। इसके बाद देर रात पुलिस ने टेंट हटाकर धरना स्थल खाली करा दिया। बारिश के बीच महिला शिक्षक अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ भी धरने पर बैठी नजर आईं।


गुरुवार सुबह जब शिक्षक दोबारा धरना स्थल पहुंचे, तो पुलिस ने करीब 50 प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर वहां से रवाना कर दिया। नए प्रदर्शनकारियों को मौके तक पहुंचने से रोकने के लिए बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर भी पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई।अतिथि शिक्षकों का कहना है कि सरकार से कई बार चर्चा हुई, लेकिन अब तक किसी मांग पर ठोस फैसला नहीं लिया गया। शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक दूरदराज और नक्सल प्रभावित इलाकों में सेवाएं दीं, लेकिन आज भी उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उनका आरोप है कि हर बार आश्वासन मिलता है, लेकिन समाधान नहीं। इससे पहले अतिथि शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के दुर्ग स्थित निवास का करीब 24 घंटे तक घेराव भी किया था। अब पुलिस कार्रवाई के बाद भी शिक्षक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
वहीं एएसपी मणिशंकर चंद्रा का कहना है कि धरना स्थल स्कूल परिसर और मुख्य मार्ग से जुड़ा है, इसलिए प्रदर्शनकारियों को वहां से हटने के लिए समझाइश दी जा रही है। कानून व्यवस्था बिगाड़ने की स्थिति में कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सरकार और अतिथि शिक्षकों के बीच गतिरोध कायम है और आंदोलन आगे किस दिशा में जाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।




