कागजों में जिंदा महिला को बताया मृत, 3 महीने से राशन-पेंशन बंद

डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस के दावों के बीच जांजगीर-चांपा जिले से प्रशासनिक लापरवाही का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। नवागढ़ ब्लॉक के ग्राम सिवनी की बुजुर्ग महिला औराबाई बरेठ को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया है।
हैरानी की बात यह है कि महिला जीवित है, लेकिन सरकारी पोर्टल पर मृत दर्ज होने के कारण पिछले करीब तीन महीनों से उन्हें राशन और सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ नहीं मिल पा रहा है। अब बुजुर्ग महिला खुद को जिंदा साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
मामला ग्राम सिवनी का है, जहां रहने वाली बुजुर्ग महिला औराबाई बरेठ हर महीने की तरह राशन लेने उचित मूल्य की दुकान पहुंचीं। लेकिन राशन दुकान की बायोमीट्रिक मशीन में उनका फिंगरप्रिंट दर्ज नहीं हुआ।
जब मामले की जानकारी जुटाई गई तो सामने आया कि खाद्य विभाग की वेबसाइट और संबंधित सरकारी पोर्टल पर महिला की स्थिति ‘मृत’ दर्ज है।


सरकारी रिकॉर्ड में हुई इस एक गलती का खामियाजा बुजुर्ग महिला को पिछले करीब 90 दिनों से भुगतना पड़ रहा है। राशन के साथ उनकी सामाजिक सुरक्षा पेंशन भी प्रभावित हो गई है।
उम्र के इस पड़ाव में राशन और पेंशन ही बुजुर्गों के लिए बड़ा सहारा होती है, लेकिन प्रशासनिक रिकॉर्ड में मृत दर्ज होने के बाद महिला के सामने जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया है।


ग्रामीणों का कहना है कि उम्रदराज लोगों के फिंगरप्रिंट कई बार बायोमीट्रिक मशीन में दर्ज नहीं हो पाते। ऐसी स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर आइरिस स्कैन या अपवाद रजिस्टर जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं। इसके बावजूद महिला को राशन और पेंशन से वंचित होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सरकारी रिकॉर्ड में एक जीवित महिला को मृत किस आधार पर दर्ज किया गया? रिकॉर्ड में हुई इस गलती की जिम्मेदारी किसकी है और महिला को उनका हक कब तक वापस मिलेगा?
अब खबर सामने आने के बाद देखना होगा कि नवागढ़ जनपद और जांजगीर-चांपा जिला प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से संज्ञान लेता है और बुजुर्ग महिला की राशन-पेंशन व्यवस्था कब तक बहाल होती है।

बाइट –
औराबाई बरेठ – पीड़ित बुजुर्ग महिला




