बस्तर दशहरा से पहले भी अधूरा अंडरग्राउंड बिजली प्रोजेक्ट, तीसरे साल भी इंतजार बरकरार

विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा से पहले जगदलपुर में चल रहा अंडरग्राउंड बिजली प्रोजेक्ट एक बार फिर सवालों के घेरे में है। करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से शुरू की गई यह परियोजना दो साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। जबकि बस्तर दशहरा शुरू होने में अब दो महीने से भी कम समय बचा है। परियोजना का उद्देश्य रथ चलन मार्ग की बिजली लाइनों को भूमिगत कर दशहरा के दौरान बिजली कटौती से राहत देना था। सीएसईबी का दावा है कि शेष कार्य 15 अगस्त से पहले पूरा कर लिया जाएगा।

करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से शुरू किए गए इस अंडरग्राउंड बिजली प्रोजेक्ट का उद्देश्य बस्तर दशहरा रथ चलन मार्ग की बिजली लाइनों को भूमिगत करना था, ताकि रथ यात्रा के दौरान हर वर्ष बिजली आपूर्ति बंद करने की आवश्यकता न पड़े।
परियोजना के तहत लगभग 5 किलोमीटर एलटी लाइन, 720 मीटर 11 केवी लाइन तथा रथ मार्ग में आने वाले चार ट्रांसफार्मरों को हटाने का कार्य शामिल है। योजना पूरी होने के बाद दशहरा के दौरान निर्बाध बिजली आपूर्ति और रथ संचालन का दावा किया गया था।
लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी बाजार क्षेत्र और रथ मार्ग की कई दुकानों के सर्विस कनेक्शन अब तक शिफ्ट नहीं किए जा सके हैं, जिससे परियोजना की प्रगति पर सवाल उठ रहे हैं।
सीएसईबी के प्रोजेक्ट अधिकारी सलीम खान के अनुसार, 11 केवी लाइन का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि एलटी लाइन का अधिकांश काम भी समाप्त हो गया है। अब केवल दुकानों के सर्विस वायर शिफ्ट करने का कार्य शेष है।
उन्होंने बताया कि कार्य के लिए बार-बार बिजली शटडाउन की आवश्यकता थी, लेकिन केंद्रीय मंत्रियों और अन्य वीआईपी दौरों के कारण समय पर शटडाउन नहीं मिल पाने से काम प्रभावित हुआ। विभाग का दावा है कि 15 अगस्त से पहले पूरा प्रोजेक्ट तैयार कर लिया जाएगा।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस वर्ष बस्तर दशहरा के दौरान रथ बिना बिजली बंद किए निकलेगा, या फिर यह महत्वाकांक्षी परियोजना एक बार फिर अधूरी रह जाएगी।

बाइट:
सलीम खान, प्रोजेक्ट अधिकारी, सीएसईबी




