
सूरजपुर जिले के रामानुजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ एक सरकारी चिकित्सक के खिलाफ की गई शिकायत पर चार महीने बाद भी कार्रवाई नहीं होने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। शिकायतकर्ता ने कलेक्टर को स्मरण पत्र सौंपकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। वहीं, संबंधित चिकित्सक का कहना है कि वे सभी कार्य नियमानुसार कर रहे हैं। देखिए यह रिपोर्ट।
रामानुजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ एमबीबीएस चिकित्सक डॉ. डी.के. विश्वकर्मा के खिलाफ शिकायतकर्ता प्रमोद पांडे ने 27 मार्च 2026 को कलेक्टर से शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शासकीय सेवा में रहते हुए डॉक्टर कथित रूप से निजी क्लीनिक संचालित कर रहे हैं। साथ ही बिना आवश्यक वैधानिक अनुमति के एक्स-रे और सोनोग्राफी सेवाएं संचालित किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि शिकायत किए जाने के चार महीने बाद भी न तो विभागीय जांच पूरी हुई और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई की गई। उनका आरोप है कि इसी वजह से कथित रूप से निजी क्लीनिक का संचालन अब भी जारी है। स्मरण पत्र में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा जांच पूरी होने तक क्लीनिक, एक्स-रे और सोनोग्राफी सेवाओं की वैधानिक स्थिति की जांच कराने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि संबंधित चिकित्सक पिछले लगभग दस वर्षों से नियमों की अनदेखी करते हुए निजी सेवाएं संचालित कर रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इनकी सत्यता का निर्धारण सक्षम प्राधिकारी की जांच के बाद ही हो सकेगा।
वहीं, संबंधित चिकित्सक डॉ. डी.के. विश्वकर्मा ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि उनके द्वारा किए जा रहे सभी कार्य नियमानुसार हैं।

बाइट:- डाकटर डी.के विश्वकर्मा
फिलहाल मामला प्रशासन के संज्ञान में है और शिकायतकर्ता निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।




