
सूरजपुर जिले के बिश्रामपुर उप तहसील कार्यालय पर रिश्वत लेने के गंभीर आरोप लगे हैं। तेलाई कछार निवासी एक दिव्यांग परिवार ने आरोप लगाया है कि कब्जानामा दिलाने के नाम पर तहसील कर्मचारी ने उनसे 25 हजार रुपये लिए, लेकिन केवल 1 हजार रुपये की रसीद दी। हालांकि, तहसील प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अब पूरे मामले की जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।


तेलाई कछार निवासी धर्मपाल चौधरी, जो स्वयं दिव्यांग हैं, ने आरोप लगाया है कि उनके परिवार की पुश्तैनी जमीन का कब्जानामा दिलाने के लिए उप तहसील कार्यालय की कर्मचारी प्रीति पांडे ने 25 हजार रुपये की मांग की। परिवार का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर यह राशि दी, लेकिन बदले में केवल 1 हजार रुपये की रसीद दी गई। शेष 24 हजार रुपये का कोई दस्तावेज उनके पास नहीं है।
धर्मपाल चौधरी का परिवार वर्षों से जूते-चप्पल की सिलाई और छाता मरम्मत का कार्य कर अपना जीवन-यापन करता है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर और दिव्यांग परिवार से इतनी बड़ी राशि लेने के आरोप ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। परिवार ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और न्याय की मांग की है।
वहीं, इस मामले में नायब तहसीलदार श्रीमती मीणा सिंह और संबंधित कर्मचारी प्रीति पांडे ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि कार्यालय में किसी प्रकार की अवैध राशि नहीं ली गई है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।

बाइट–1:
श्रीमती मीणा सिंह, नायब तहसीलदार
बाइट–2:
धर्मपाल चौधरी, आवेदक
फिलहाल यह मामला आरोप और इनकार के बीच है। पूरे प्रकरण की सच्चाई प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों पर कार्रवाई हो सकती है।




