कोरबाछत्तीसगढ़

सरगबुंदिया पंचायत में बवाल: 4 दिन से सरपंच के घर के बाहर धरने पर ग्रामीण, नहीं दे रहे जवाब

रिपोर्टर: सरोज रात्रे / लोकेशन: कोरबा (करतला)

कोरबा जिले के करतला जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत सरगबुंदिया में इन दिनों हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। गांव के बड़ी संख्या में ग्रामीण पिछले चार दिनों से लगातार सरपंच के घर के सामने धरना दे रहे हैं। ग्रामीण शाम होते ही एकत्र होते हैं और देर रात तक सरपंच का इंतजार करते हैं, लेकिन अब तक सरपंच उनके सामने नहीं आए हैं।
सरपंच पर सवाल, ग्रामीणों में नाराजगी


ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच जानबूझकर उनसे दूरी बना रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या वे किसी अनियमितता या भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हैं, या फिर ग्रामीणों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
ग्राम सभा को लेकर गंभीर आरोप
ग्रामीणों ने सरपंच और सचिव पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पिछले चार वर्षों में ग्राम सभा की नियमित बैठक नहीं कराई गई। बिना बैठक के ही प्रस्ताव पारित किए जाने का भी आरोप है।
इसके अलावा बैठक की तिथि बदलकर सीमित लोगों के साथ बैठक करने और अधिकतर पंचों व ग्रामीणों को सूचना नहीं देने की बात भी सामने आई है।


ग्रामीणों के अनुसार, जब वे पंचायत भवन पहुंचते हैं तो “कोरम पूरा नहीं होने” का हवाला देकर बैठक स्थगित कर दी जाती है।
2 मई की बैठक में विवाद
2 मई 2026 को आयोजित बैठक में भी विवाद सामने आया। आरोप है कि सरपंच ने कुछ पंचों के साथ बैठक शुरू की और बाकी पंचों के पहुंचने से पहले ही पंचायत भवन में ताला लगाकर वहां से चले गए। बाद में संपर्क करने पर उन्होंने खुद को शासकीय कार्य में व्यस्त बताया।
सचिव पर भी लापरवाही के आरोप


ग्राम पंचायत के सचिव प्रमोद कुमार राठिया पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे मुख्यालय में उपस्थित नहीं रहते, बैठकों की सूचना समय पर नहीं देते और पिछले एक वर्ष से लगातार बैठकों को टालते आ रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच और सचिव की मिलीभगत से पंचायत का कामकाज प्रभावित हो रहा है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग


ग्रामीणों का विरोध अब तेज हो गया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पंचायत में हो रही अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए, सचिव को तत्काल हटाया जाए और ग्राम सभा की नियमित व पारदर्शी बैठक सुनिश्चित की जाए।
बड़ा सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरपंच आखिर ग्रामीणों के सामने आने से क्यों बच रहे हैं?
क्या पंचायत में अनियमितताओं को छिपाने की कोशिश की जा रही है या फिर यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला है?

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