छत्तीसगढ़ में भूमि अभिलेखों का पूर्ण डिजिटलीकरण — अब तहसील से लेकर खेत तक हर जानकारी होगी मोबाइल पर उपलब्ध

छत्तीसगढ़ में राजस्व एवं भूमि अभिलेख प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में भूमि रिकॉर्ड्स का व्यापक डिजिटलीकरण करते हुए अब 117 उपविभाग, 251 तहसीलें, 5,828 पटवारी क्षेत्र और 20,551 गाँवों के करीब 2.51 करोड़ खसरा-नक्शे डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध करा दिए गए हैं। यह कदम ग्रामीण व कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और विवादों के त्वरित समाधान के उद्देश्य से लिया गया है।
सरकार ने ‘डिजिटल तहसील’ की नई व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत—
ऑनलाइन सुनवाई होगी,
ज़मीन संबंधी मामलों का डिजिटल परीक्षण और निपटान किया जाएगा,
भूमि-उपयोग परिवर्तन (Auto-Diversion) के प्रकरणों को सिर्फ 15 दिनों में निपटाने का लक्ष्य तय किया गया है।
यह व्यवस्था किसानों, भू-मालिकों और आम नागरिकों के लिए बड़ी राहत साबित होने वाली है, क्योंकि पहले ऐसे मामलों में महीनों तक समय लग जाता था।
राज्य में 155 तहसीलों में आधुनिक रिकॉर्ड रूम तैयार किए जा चुके हैं, जहाँ भूमि दस्तावेजों का सुरक्षित संग्रहण और त्वरित उपलब्धता का प्रावधान है। इसके साथ ही अब किसान और भू-मालिक मोबाइल पर ही पूरी भूमि-जानकारी, खसरा-खतौनी की प्रतिलिपि, नक्शे और राजस्व स्थिति देख सकेंगे। इससे उन्हें न तो बार-बार तहसील जाना पड़ेगा और न ही लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ेगा।
सरकार का कहना है कि यह डिजिटल सुधार न सिर्फ प्रशासनिक दक्षता बढ़ाएगा, बल्कि—
भूमि विवादों में कमी,
भ्रष्टाचार पर अंकुश,
राजस्व मामलों में पारदर्शिता,
और किसानों के लिए तेज़ एवं सरल सुविधा
सुनिश्चित करने वाला सिद्ध होगा।
राज्य शासन का दावा है कि आने वाले समय में भूमि से संबंधित सभी सेवाएँ पूरी तरह ऑनलाइन की जाएँगी, जिससे छत्तीसगढ़ देश के सबसे अग्रणी डिजिटल-राजस्व राज्यों में शामिल होगा।




