
रिपोर्टर – सरोज रात्रे / लोकेशन – कोरबा
कोरबा जिले में जल जीवन मिशन अब ग्रामीणों के लिए “हर घर जल” नहीं बल्कि “हर दिन संकट” बनता नजर आ रहा है। करोड़ों की योजनाओं और बड़े-बड़े दावों के बीच पाली ब्लॉक के ठाड़पखना गांव की तस्वीर सरकारी व्यवस्था की पोल खोल रही है। यहां दो साल पहले शुरू हुई पानी टंकी योजना आज भी अधूरी पड़ी है।



पाली ब्लॉक के ग्राम पंचायत सगुना अंतर्गत ठाड़पखना गांव में जल जीवन मिशन के तहत क्रेडा विभाग द्वारा पानी टंकी निर्माण का काम शुरू किया गया था। लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी योजना पूरी नहीं हो सकी है। मौके पर केवल लोहे का ढांचा खड़ा दिखाई देता है, जबकि ना पानी की टंकी लगाई गई और ना ही बोरिंग कराई गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि योजना शुरू होने के बाद ठेकेदार और जिम्मेदार विभाग ने गांव की ओर पलटकर तक नहीं देखा। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यह ढांचा एक ग्रामीण की निजी जमीन पर खड़ा किया गया है, जिससे आंधी-तूफान के दौरान हादसे का खतरा बना हुआ है।



भीषण गर्मी में गांव के लोग आज भी पीने के पानी के लिए कुएं और एकमात्र बोरवेल पर निर्भर हैं। लेकिन लगातार गिरते जलस्तर ने ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि “हर घर जल” का सपना अब तक सिर्फ कागजों में ही दिखाई दे रहा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर दो साल बाद भी जल जीवन मिशन की यह योजना अधूरी क्यों है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या फिर ग्रामीणों को इसी तरह पानी के लिए संघर्ष करना पड़ेगा?
कोरबा जिले के पाली ब्लॉक स्थित ठाड़पखना गांव में जल जीवन मिशन के तहत शुरू की गई पानी टंकी योजना दो साल बाद भी अधूरी पड़ी है। मौके पर सिर्फ लोहे का ढांचा खड़ा है, जबकि ना टंकी लगाई गई और ना ही बोरिंग हुई। भीषण गर्मी में ग्रामीण पानी के लिए परेशान हैं और कुएं व एकमात्र बोरवेल पर निर्भर हैं। ग्रामीणों ने योजना में लापरवाही और जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी का आरोप लगाया है।




