
लोकेशन: सुखरीकला, कोरबा | छत्तीसगढ़ / रिपोर्टर: सरोज रात्रे
सुशासन तिहार के दौरान बड़े उत्साह के साथ किए गए पौधारोपण अभियान की हकीकत अब सामने आने लगी है। कोरबा जिले के ग्राम पंचायत सुखरीकला में विश्व पर्यावरण दिवस पर लगाए गए कई पौधे देखरेख और पानी के अभाव में सूखने लगे हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के दावों पर सवाल उठ रहे हैं।






विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने ग्राम पंचायत सुखरीकला में पौधारोपण कर हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया था। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में पौधे लगाए गए और उनकी सुरक्षा एवं संरक्षण का संकल्प भी लिया गया था।
लेकिन कुछ ही दिनों बाद लगाए गए कई पौधे सूखने लगे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पौधे लगाने के बाद उनकी देखभाल नहीं की गई। नियमित सिंचाई और संरक्षण के अभाव में पौधे दम तोड़ रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पौधारोपण कार्यक्रम केवल फोटो खिंचवाने और प्रचार-प्रसार तक सीमित होकर रह गया। उनका कहना है कि यदि पौधों की देखरेख नहीं की जाएगी, तो ऐसे आयोजनों का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
सूखते पौधे अब कई सवाल खड़े कर रहे हैं। क्या पौधारोपण के बाद उनकी निगरानी और देखभाल की कोई जिम्मेदारी तय की गई थी? यदि की गई थी, तो उसका पालन क्यों नहीं हुआ? पर्यावरण संरक्षण के नाम पर किए गए इस अभियान की वास्तविक सफलता अब पौधों के जीवित रहने पर ही निर्भर है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। तभी पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य को सार्थक बनाया जा सकता है।
अब देखना होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि सूखते पौधों को बचाने के लिए आगे आते हैं या फिर यह पौधारोपण अभियान भी सरकारी दावों और तस्वीरों तक ही सीमित रह जाएगा।




