
कोरबा जिले के ग्राम पंचायत सुखरीकला में सुशासन तिहार के दौरान बड़े उत्साह के साथ किए गए पौधारोपण अभियान पर अब सवाल उठने लगे हैं। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर लगाए गए कई पौधे देखरेख और पानी के अभाव में सूखने लगे हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के दावों की हकीकत सामने आने लगी है।


विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने ग्राम पंचायत सुखरीकला में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया था। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में पौधे लगाए गए और हरियाली बढ़ाने के संकल्प लिए गए।
लेकिन कुछ ही दिनों बाद इन पौधों की स्थिति चिंताजनक नजर आने लगी है। कई पौधे पानी और नियमित देखरेख के अभाव में सूखने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पौधारोपण केवल औपचारिकता बनकर रह गया है और जिम्मेदारों ने पौधे लगाने के बाद उनकी सुध नहीं ली।
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि पौधारोपण के बाद संरक्षण और रखरखाव की व्यवस्था नहीं की जाएगी, तो ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य कैसे पूरा होगा। उनका कहना है कि केवल फोटो खिंचवाकर और प्रचार-प्रसार कर पर्यावरण संरक्षण नहीं किया जा सकता।
सूखते पौधे अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। लोगों का मानना है कि पौधारोपण के साथ-साथ उनकी सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए, ताकि पर्यावरण संरक्षण के प्रयास वास्तव में सफल हो सकें।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इन पौधों को बचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाते हैं या फिर यह पौधारोपण अभियान भी सिर्फ सरकारी दावों और तस्वीरों तक ही सीमित रह जाएगा।




