
लोकेशन: पाली, कोरबा | छत्तीसगढ़ / रिपोर्टर: सरोज रात्रे
क्या जंगल बचाने के नाम पर वर्षों से बसे लोगों को बिना पुनर्वास के बेघर किया जा सकता है? कोरबा जिले के पाली क्षेत्र से सामने आई तस्वीरों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम नोनबिर्रा के खलारीपारा में वन विभाग और पुलिस की कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना पूर्व सूचना और नोटिस के उनके मकानों पर बुलडोजर चला दिया गया।















कोरबा जिले के पाली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नोनबिर्रा के खलारीपारा में वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के बाद विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों का दावा है कि 13 जून को वन विभाग और पुलिस की टीम जेसीबी मशीन के साथ पहुंची और करीब 25 वर्षों से निवास कर रहे आदिवासी परिवारों के कच्चे और पक्के मकानों को तोड़ दिया।
ग्रामीणों के अनुसार कार्रवाई से पहले उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया और न ही वैकल्पिक व्यवस्था या पुनर्वास की जानकारी दी गई। प्रभावित परिवारों का कहना है कि बारिश के मौसम में उनके सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है।
महिलाओं ने आरोप लगाया है कि विरोध करने पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। कुछ महिलाओं का दावा है कि उन्हें जबरन घरों से बाहर निकाला गया, जिससे उन्हें चोटें भी आईं।
कार्रवाई के दौरान राशन, कपड़े, बर्तन और अन्य घरेलू सामान मलबे में दब जाने की बात भी सामने आई है। प्रभावित परिवारों ने पाली थाने में लिखित शिकायत देकर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे।
हालांकि इस पूरे मामले में वन विभाग और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है। प्रशासन का पक्ष आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और प्रभावित परिवार न्याय की मांग कर रहे हैं।


