
रायगढ़। तमनार थाना क्षेत्र के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में रायगढ़ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। विशेष न्यायाधीश, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, रायगढ़ ने थाना तमनार के अपराध क्रमांक 268/2023 में चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को दो-दो आजीवन कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने यह फैसला 31 जुलाई 2026 को सुनाया।
अभियोजन के अनुसार 19 जुलाई 2023 की रात करीब 10:30 बजे ग्राम गोढ़ी में पुरानी रंजिश के चलते आरोपियों ने पूर्व नियोजित षड्यंत्र के तहत अनुसूचित जनजाति वर्ग के राघुवन चौहान और उद्धव चौहान पर टांगी, डंडे एवं अन्य घातक हथियारों से हमला कर उनकी हत्या कर दी। घटना के बाद आरोपियों ने एक शव को सड़क तक घसीटकर मामले को दुर्घटना का रूप देने का भी प्रयास किया।
घटना की सूचना मिलते ही तमनार पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। प्रारंभिक विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक आशीर्वाद राहटगांवकर ने की। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने, आरोपियों से पूछताछ, मेमोरेंडम के आधार पर हत्या में प्रयुक्त हथियारों की बरामदगी तथा वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन जैसी महत्वपूर्ण कार्रवाई की गई।
अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत प्रकरण की आगे की विवेचना तत्कालीन एसडीओपी धरमजयगढ़ दीपक मिश्रा ने की। उन्होंने प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराए, आवश्यक दस्तावेजी साक्ष्य एकत्र किए और मजबूत अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कराया।
मामले में राज्य शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक राजीव बेरीवाल ने प्रभावी पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष 22 गवाहों, 81 दस्तावेजी साक्ष्यों तथा 20 भौतिक साक्ष्यों को प्रस्तुत किया। मजबूत साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने चारों आरोपियों को दोषी करार दिया।
दोषी ठहराए गए आरोपियों में हरिलाल उरांव, मुकेश पडिहारी, जितेंद्र पटनायक उर्फ जीतू तथा गणेश पडिहारी, सभी निवासी ग्राम गोढ़ी, थाना तमनार, जिला रायगढ़ शामिल हैं।
रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि गंभीर अपराधों की वैज्ञानिक, निष्पक्ष और तथ्यपरक विवेचना ही अपराधियों को न्यायालय से कठोर सजा दिलाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने जिले के सभी विवेचकों को प्रत्येक गंभीर प्रकरण में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान और न्यायालयीन प्रक्रिया के समयबद्ध पालन के निर्देश दिए हैं। प्रस्तुत प्रकरण में भी सुदृढ़ विवेचना और प्रभावी अभियोजन के चलते आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा दिलाने में सफलता मिली।




